अध्याय 1 – विकास
सभी प्रश्न-उत्तर (अभ्यास + अंदर के प्रश्न)
भाग A: अभ्यास प्रश्न
व्याख्या: किसी देश का विकास प्रति व्यक्ति आय, औसत साक्षरता स्तर और लोगों की स्वास्थ्य स्थिति — इन सभी आधारों पर निर्धारित किया जा सकता है। केवल आय ही विकास का मापदंड नहीं है।
व्याख्या: तालिका 1.6 (पृष्ठ 13) के अनुसार, श्रीलंका का HDI क्रमांक 78 है, जो भारत (134) से बेहतर है।
गणना: कुल औसत = 5,000 × 4 = 20,000; तीन परिवारों की कुल आय = 4,000 + 7,000 + 3,000 = 14,000; चौथे परिवार की आय = 20,000 – 14,000 = 6,000 रुपये
सीमाएँ:
- यह केवल औसत आय बताता है, यह नहीं बताता कि आय कैसे वितरित है।
- यह विकास के अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा, समानता को नजरअंदाज करता है।
- यह लोगों के जीवन स्तर या कल्याण को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
- विश्व बैंक केवल प्रति व्यक्ति आय को मापता है, जबकि UNDP शिक्षा, स्वास्थ्य और आय — तीनों को मापता है।
- UNDP जन्म के समय जीवन प्रत्याशा, साक्षरता दर और प्रति व्यक्ति आय को जोड़ता है।
- UNDP का HDI मानव कल्याण को अधिक व्यापक रूप से दर्शाता है।
सीमाएँ:
- औसत समान वितरण को नहीं दर्शाता।
- औसत के पीछे छिपी असमानताएँ पता नहीं चलतीं।
- जैसे — तालिका 1.2 में दो देशों की औसत आय समान हो सकती है, परंतु वितरण भिन्न हो सकता है।
लेकिन यह कहना कि प्रतिव्यक्ति आय एक उपयोगी मापदंड बिल्कुल नहीं है, सही नहीं है। प्रतिव्यक्ति आय विकास का एक महत्वपूर्ण मापदंड है, परंतु यह अकेला पर्याप्त नहीं है। विकास को मापने के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, समानता जैसे अन्य मापदंडों का भी उपयोग करना चाहिए।
- पारंपरिक स्रोत: लकड़ी, गोबर, कोयला, पेट्रोलियम
- गैर-पारंपरिक स्रोत: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल विद्युत, बायोगैस
- जीवाश्म ईंधन समाप्त हो सकते हैं।
- नवीकरणीय ऊर्जा का प्रयोग बढ़ेगा।
- ऊर्जा संरक्षण पर जोर दिया जाएगा।
- यह सुनिश्चित करता है कि भावी पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधन उपलब्ध रहें।
- यह प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन को रोकता है।
- यह पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के बीच संतुलन बनाता है।
- पृथ्वी के संसाधन सभी की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त हैं।
- लेकिन लालचवश अत्यधिक उपभोग से संसाधन समाप्त हो सकते हैं।
- इसलिए विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें संसाधनों का न्यायपूर्ण और धारणीय उपयोग हो।
- नदियों और तालाबों में प्रदूषण
- वायु प्रदूषण (वाहनों और कारखानों से)
- भूमिगत जल स्तर में गिरावट
- वनों की कटाई
- मिट्टी का कटाव और बंजर होना
- प्लास्टिक कचरा और ठोस कचरे का बढ़ना
| मद | सबसे ऊपर | सबसे नीचे |
|---|---|---|
| सकल राष्ट्रीय आय प्रति व्यक्ति | श्रीलंका (11,899) | नेपाल (4,026) |
| जन्म के समय संभावित आयु | श्रीलंका (76.6) | पाकिस्तान (66.4) |
| विद्यालयी औसत आयु | श्रीलंका (11.2) | नेपाल (4.4) |
| HDI क्रमांक | श्रीलंका (78) | नेपाल (146) |
(क) केरल और मध्य प्रदेश के लोगों के पोषण स्तरों की तुलना कीजिए।
केरल में कम बी.एम.आई. वाले पुरुष 8.5% और महिलाएँ 10% हैं, जबकि मध्य प्रदेश में पुरुष 28% और महिलाएँ 28% हैं। इससे स्पष्ट है कि मध्य प्रदेश में कुपोषण की समस्या केरल से अधिक गंभीर है। केरल में पोषण स्तर बेहतर है।
(ख) क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि देश में लगभग पाँच में से एक व्यक्ति अल्पपोषित क्यों है?
देश में पर्याप्त खाद्य होने के बावजूद लगभग पाँच में से एक व्यक्ति अल्पपोषित है, क्योंकि —
- खाद्य का असमान वितरण है।
- गरीबी के कारण कुछ लोग पर्याप्त भोजन नहीं खरीद पाते।
- पौष्टिक आहार की जानकारी का अभाव है।
- स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी है।
भाग B: आओ-इन पर विचार करें
(क) क्योंकि लोग भिन्न होते हैं।
(ख) क्योंकि लोगों के जीवन की परिस्थितियाँ भिन्न हैं।
व्याख्या: लोगों की विकास की धारणाएँ इसलिए अलग हैं क्योंकि उनकी जीवन स्थितियाँ अलग हैं। जैसे — भूमिहीन ग्रामीण मजदूर के लिए विकास का अर्थ है अधिक दिन का काम और बेहतर मजदूरी, जबकि एक किसान के लिए विकास का अर्थ है बेहतर सिंचाई और अच्छी कीमतें।
(क) लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न होते हैं।
(ख) लोगों के विकास के लक्ष्यों में परस्पर विरोध होता है।
- (क) लोगों के विकास के लक्ष्य भिन्न होते हैं — इसका अर्थ है कि अलग-अलग लोगों के अलग-अलग लक्ष्य होते हैं।
- (ख) लोगों के विकास के लक्ष्यों में परस्पर विरोध होता है — इसका अर्थ है कि कभी-कभी एक व्यक्ति का विकास दूसरे व्यक्ति के लिए विनाशकारी हो सकता है। जैसे — बाँध बनाने से एक को सिंचाई का लाभ मिलता है, तो दूसरे का घर डूब सकता है।
- स्वतंत्रता और समानता
- सुरक्षा (जीवन की सुरक्षा)
- सम्मान और आत्म-सम्मान
- स्वास्थ्य और शिक्षा
- पर्यावरण की स्वच्छता
- भाईचारा और सामाजिक मेल-मिलाप
- विकास का अर्थ केवल अधिक आय नहीं है।
- लोग सुरक्षा, सम्मान, स्वतंत्रता और समानता भी चाहते हैं।
- विकास के लक्ष्य अलग-अलग व्यक्तियों के लिए अलग-अलग हो सकते हैं।
- कभी-कभी एक व्यक्ति का विकास दूसरे के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
भाग C: आइए चर्चा करें
भारत में भी ऐसी ही स्थिति है। आरेख 1.1 (पृष्ठ 7) के अनुसार, भारत में 85% कृषक सीमांत और छोटे किसान हैं, जिनके पास कुल कृषि क्षेत्र का केवल 44.6% है, जबकि 15% अर्ध-मझोले और बड़े किसानों के पास 55.4% कृषि क्षेत्र है।
- सभी विचारों को बराबर महत्व नहीं दिया जा सकता, क्योंकि कुछ विचार परस्पर विरोधी होते हैं।
- निर्णय लेते समय यह देखना चाहिए कि किसका लाभ अधिक लोगों को मिलेगा।
- सरकार को सर्वहित के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
- न्यायपूर्ण और सही विकास के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करना चाहिए।
(क) किन लोगों को लाभ हुआ और किन को नहीं?
(ख) इस देश के विकास के लक्ष्य क्या होने चाहिए?
(ग) आपके गाँव या शहर या स्थानीय इलाके के विकास के लक्ष्य क्या होने चाहिए?
(क)
- लाभ: बहुराष्ट्रीय कंपनी को लाभ हुआ, क्योंकि उसने सस्ते में कचरा फेंक दिया।
- हानि: आइवरी कोस्ट के स्थानीय लोगों को भारी नुकसान हुआ — 7 लोग मारे गए, 20 अस्पताल में भर्ती, और 26,000 लोगों का इलाज करना पड़ा।
- नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा।
- पर्यावरण संरक्षण।
- सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण।
- ऐसी नीतियाँ जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के शोषण को रोकें।
- स्वच्छ पेयजल और स्वच्छता।
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ।
- बेहतर सड़कें और बिजली।
- प्रदूषण मुक्त वातावरण।
- रोजगार के अवसर।
भाग D: कार्यकलाप
| श्रेणी | पुरुष | महिला |
|---|---|---|
| ग्रामीण जनसंख्या की साक्षरता दर | 76% | 54% |
| 10-14 वर्ष के ग्रामीण बच्चों में साक्षरता दर | 90% | 87% |
| 10-14 वर्ष की आयु के स्कूल जाने वाले ग्रामीण बच्चों की प्रतिशत | 85% | 82% |
(क) सभी आयु वर्गों की साक्षरता दर, जिसमें युवक और वृद्ध दोनों सम्मिलित हैं, ग्रामीण पुरुषों के लिए 76% थी और ग्रामीण महिलाओं के लिए 54% थी। यही नहीं कि बहुत से वयस्क स्कूल ही नहीं जा पाए बल्कि वर्तमान में स्कूल में नहीं है। इस समय स्कूल में नहीं है।
(ख) इस तालिका से स्पष्ट है कि 13% प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ और 10% प्रतिशत ग्रामीण लड़के स्कूल नहीं जा रहे हैं। इसलिए, 10 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों में से 13% प्रतिशत ग्रामीण लड़कियाँ और 10% प्रतिशत ग्रामीण लड़के निरक्षर हैं।
(ग) हमारी स्वतंत्रता के 75 वर्षों के बाद भी, 10-14 वर्ष आयु के वर्ग में इस उच्च स्तर की निरक्षरता चिंताजनक है। बहुत से अन्य राज्यों में भी 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों को निशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के सर्वैधानिक लक्ष्य के निकट भी नहीं पहुँच पाए हैं, जबकि इस लक्ष्य को 1960 तक पूरा करना था।
भाग E: तालिका 1.1 – विकास के लक्ष्य
| व्यक्ति की श्रेणी | विकास के लक्ष्य/आकांक्षाएँ |
|---|---|
| भूमिहीन ग्रामीण मजदूर | काम करने के अधिक दिन और बेहतर मजदूरी; स्थानीय स्कूल उनके बच्चों को उत्तम शिक्षा प्रदान करने में सक्षम; कोई सामाजिक भेदभाव नहीं और गाँव में भी नेता बन सकते हैं। |
| पंजाब के समृद्ध किसान | किसानों को उनकी उपज के लिए स्वयं समर्थन मूल्यों और मेहनती और सस्ते मजदूर; ट्रैक्टर और पंपिंग सेट के लिए सस्ती कीमतें; अच्छी पैदावार के लिए सिंचाई व्यवस्था; उच्च पारिवारिक आय सुनिश्चित करना ताकि वे अपने बच्चों को विदेशों में बसा सकें। |
| किसान जो खेती के लिए केवल वर्षा पर निर्भर हैं | खेती के लिए सिंचाई की उचित व्यवस्था; अच्छे बीज, खाद और मशीनों की उपलब्धता; फसल का अच्छा दाम मिलना चाहिए ताकि परिवार का गुजारा हो सके। |
| भूस्वामी परिवार की एक ग्रामीण महिला | परिवार के काम के अतिरिक्त शिक्षा और आत्मनिर्भरता; समाज में सम्मान और निर्णय लेने की स्वतंत्रता; महिलाओं को समान अधिकार मिले। |
| शहरी बेरोजगार युवक | नौकरी के अवसर; कौशल विकास का प्रशिक्षण; शहर में बेहतर जीवनयापन और सुरक्षा; परिवार का सहयोग। |
| शहर के अमीर परिवार का एक लड़का | उच्च शिक्षा के अवसर; अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए सस्ता श्रम; अपने कारोबार में बढ़ोतरी। |
| शहर के अमीर परिवार की एक लड़की | उसे अपने भाई के जैसी आजादी मिलती है और वह अपने फैसले खुद कर सकती है। वह अपनी पढ़ाई विदेश में कर सकती है। |
| नर्मदा घाटी का एक आदिवासी | अपने घर और खेती में बने रहना; विस्थापन से बचाव; उचित मुआवजा; सिंचाई से लाभ; सरकारी सुविधाएँ जैसे स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र। |
भाग F: कार्यकलाप 2 – तालिका 1.5
- ग्रामीण पुरुषों की साक्षरता दर 76% है, जबकि महिलाओं की 54% — यह लैंगिक असमानता दर्शाता है।
- 10-14 वर्ष के बच्चों में साक्षरता दर पुरुष 90% और महिला 87% है — यह सुधार दर्शाता है।
- 10-14 वर्ष के स्कूल जाने वाले बच्चों का प्रतिशत पुरुष 85% और महिला 82% है।
- निष्कर्ष: शिक्षा में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी लड़कियों की स्थिति लड़कों से पीछे है।
