📘 Class 9 – Economics
पालमपुर गाँव की कहानी
अभ्यास प्रश्नों के सटीक उत्तर (Book ke Anusar)
प्रश्न 1: भारत में जनगणना के दौरान दस वर्ष में एक बार प्रत्येक गाँव का सर्वेक्षण किया जाता है। पालमपुर से संबंधित सूचनाओं के आधार पर निम्न तालिका को भरिये —
उत्तर:
| विवरण | जानकारी (पालमपुर गाँव) |
| (क) अवस्थिति क्षेत्र | पालमपुर गाँव, उत्तर प्रदेश (काल्पनिक गाँव) |
| (ख) गाँव का कुल क्षेत्र | लगभग 500 हेक्टेयर |
| (ग) भूमि का उपयोग (हेक्टेयर में) | कृषि योग्य भूमि – 450 हेक्टेयर, गैर-कृषि भूमि – 26 हेक्टेयर (निवास स्थान, सड़कें, तालाब, चरागाह आदि) |
| (घ) सुविधाएँ | शैक्षिक: एक हाई स्कूल, दो प्राथमिक विद्यालय। चिकित्सा: एक राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और एक निजी औषधालय। बाजार: पक्की सड़क से जुड़ा हुआ। बिजली पूर्ति: नलकूप बिजली से चलते हैं। संचार: सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा है। |
प्रश्न 2: खेती की आधुनिक विधियों के लिए ऐसे अधिक आगतों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है, क्या आप सहमत हैं?
उत्तर: हाँ, हम पूरी तरह सहमत हैं। पालमपुर में खेती की आधुनिक विधियों (जैसे एच.वाई.वी. बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक, ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, थ्रेशर, पंप सेट आदि) के लिए उन आगतों की आवश्यकता होती है, जिन्हें उद्योगों में विनिर्मित किया जाता है। ये सभी चीजें किसानों को बाजार से खरीदनी पड़ती हैं, जो सीधे खेत में नहीं बनतीं।
प्रश्न 3: पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की किस तरह मदद की?
उत्तर: पालमपुर में बिजली के प्रसार ने किसानों की निम्नलिखित तरीकों से मदद की —
- बिजली से चलने वाले नलकूपों ने सिंचाई की पद्धति को ही बदल दिया।
- किसान कुँओं से रहट द्वारा पानी निकालने के बजाय नलकूपों का प्रयोग करने लगे।
- इससे अधिक क्षेत्र की सिंचाई की जा सकती थी और सिंचाई अधिक प्रभावकारी ढंग से होने लगी।
- 1970 के दशक के मध्य तक 200 हेक्टेयर के पूरे जोते हुए क्षेत्र की सिंचाई होने लगी।
प्रश्न 4: क्या सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्वपूर्ण है? क्यों?
उत्तर: हाँ, सिंचित क्षेत्र को बढ़ाना महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत में सभी गाँवों में ऐसी उच्च स्तरीय सिंचाई व्यवस्था नहीं है। नदी मैदानों के अतिरिक्त, हमारे देश में तटीय क्षेत्रों में अच्छी सिंचाई होती है। इसके विपरीत, पठारी क्षेत्रों में सिंचाई कम होती है। देश में आज भी कुल कृषि क्षेत्र के 40 प्रतिशत से भी कम क्षेत्र में ही सिंचाई होती है। शेष क्षेत्रों में खेती मुख्यतः वर्षा पर निर्भर है। ऐसी स्थिति में सिंचाई का विस्तार करना फसल उत्पादन बढ़ाने के लिए आवश्यक है।
प्रश्न 5: पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि के वितरण की एक सारणी बनाइए।
उत्तर: पालमपुर के 450 परिवारों में भूमि का वितरण अत्यंत असमान है। पालमपुर गाँव में 450 परिवारों में से लगभग एक तिहाई अर्थात् 150 परिवारों के पास खेती के लिए भूमि नहीं है, जो अधिकांशतः दलित हैं। शेष 240 परिवारों के पास भूमि है। इनमें 2 हेक्टेयर से कम क्षेत्रफल वाले छोटे भूमि के टुकड़ों पर खेती करने वाले परिवारों की पर्याप्त आमदनी नहीं होती।
| परिवार का प्रकार | परिवारों की संख्या (लगभग) |
| भूमिहीन परिवार | 150 (एक तिहाई) |
| छोटे किसान (2 हेक्टेयर से कम भूमि) | 240 |
| मझोले और बड़े किसान (2 हेक्टेयर से अधिक भूमि) | 60 |
प्रश्न 6: पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम क्यों है?
उत्तर: पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों की मजदूरी न्यूनतम मजदूरी से कम है क्योंकि पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों में बहुत ज्यादा स्पर्धा है, इसलिए लोग कम वेतन में भी काम करने को सहमत हो जाते हैं। डाला अपनी स्थिति के बारे में रामकली से शिकायत करता है, जो कि एक अन्य खेतिहर श्रमिक है। डाला और रामकली दोनों गाँव के निर्धनतम व्यक्तियों में से हैं।
प्रश्न 7: अपने क्षेत्र में दो श्रमिकों से बात कीजिए। खेतों में काम करने वाले या विनिर्माण कार्य में लगे मजदूरों में से किसी को चुनें। उन्हें कितनी मजदूरी मिलती है? क्या उन्हें नकद पैसा मिलता है या वस्तु-रूप में? क्या उन्हें नियमित रूप से काम मिलता है? क्या वे कर्ज में हैं?
उत्तर: यह एक क्रियात्मक (Activity) प्रश्न है। इसका उत्तर छात्र को अपने आस-पास के दो श्रमिकों से बात करके स्वयं देना होता है। लेकिन पालमपुर के आधार पर हम यह कह सकते हैं —
- मजदूरी: पालमपुर में खेतिहर श्रमिकों को दैनिक मजदूरी मिलती है, जो सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी (₹300 प्रतिदिन, मार्च 2019) से भी कम है।
- नकद या वस्तु: मजदूरी नकद (पैसा) या वस्तु (अनाज) दोनों रूपों में मिल सकती है।
- नियमितता: श्रमिकों को साल भर नियमित काम नहीं मिलता, जैसे डाला को सिर्फ 5 महीने ही काम मिलता है।
- कर्ज: पालमपुर में श्रमिक कर्ज में डूबे हुए हैं, जैसे डाला को ₹2,000 का कर्ज साहूकार को देना है।
प्रश्न 8: एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के अलग-अलग कौन से तरीके हैं? समझाने के लिए उदाहरणों का प्रयोग कीजिए।
उत्तर: एक ही भूमि पर उत्पादन बढ़ाने के मुख्य तरीके निम्नलिखित हैं —
- बहुविध फसल प्रणाली: एक वर्ष में किसी भूमि पर एक से ज्यादा फसल पैदा करने की विधि। जैसे — पालमपुर में किसान वर्षा के मौसम में ज्वार और बाजरा उगाते हैं, अक्टूबर-दिसंबर में आलू, और सर्दी के मौसम में गेहूँ उगाते हैं।
- आधुनिक कृषि विधियाँ: जैसे एच.वाई.वी. बीजों का प्रयोग, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग। इससे उत्पादन बढ़ता है।
प्रश्न 9: एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के कार्य का ब्यौरा दीजिए।
उत्तर: एक हेक्टेयर भूमि के मालिक किसान के दैनिक कार्य निम्न प्रकार हैं —
- खेत की जुताई और तैयारी करना।
- बीज बोना।
- समय-समय पर सिंचाई करना।
- निराई-गुड़ाई और घास हटाना।
- उर्वरक और कीटनाशकों का छिड़काव।
- फसल की देखभाल और कटाई।
- अनाज की मड़ाई, सफाई और भंडारण।
- फसल को मंडी में बेचना।
प्रश्न 10: मझोले और बड़े किसान कृषि से कैसे पूँजी प्राप्त करते हैं? वे छोटे किसानों से कैसे भिन्न हैं?
उत्तर: मझोले और बड़े किसान कृषि से पूँजी प्राप्त करने के लिए अपने अधिशेष कृषि उत्पादों को बाजार में बेचते हैं। बाजार में बेचने से उन्हें अच्छी कमाई होती है। इस कमाई के एक भाग को वे अगले मौसम के लिए पूँजी के रूप में बचा कर रख लेते हैं। इस तरह वे अपनी खेती के लिए पूँजी की व्यवस्था अपनी ही बचतों से कर लेते हैं। जबकि छोटे किसानों के पास बचत नहीं होती। इसके विपरीत छोटे किसानों को पूँजी की व्यवस्था करने के लिए पैसा उधार लेना पड़ता है और कर्ज चुकाने के लिए उन्हें बहुत कष्ट सहने पड़ते हैं।
प्रश्न 11: सविता को किन शर्तों पर तेजपाल सिंह से ऋण मिला है? क्या ब्याज की कम दर पर बैंक से कर्ज मिलने पर सविता की स्थिति अलग होती?
उत्तर: सविता को तेजपाल सिंह से निम्नलिखित शर्तों पर ऋण मिला है —
- तेजपाल सिंह ने सविता को 24 प्रतिशत की दर पर चार महीने के लिए कर्ज देने की तैयारी की, जो ब्याज की एक बहुत ऊँची दर है।
- सविता को यह भी वचन देना पड़ता है कि वह कटाई के मौसम में उसके खेतों में एक श्रमिक के रूप में 100 रु. प्रतिदिन पर काम करेगी।
बैंक से कम ब्याज दर पर कर्ज मिलने पर सविता की स्थिति: हाँ, अगर ब्याज की कम दर पर बैंक से कर्ज मिलता, तो सविता की स्थिति अलग होती। उसे ऊँची ब्याज दर पर कर्ज नहीं लेना पड़ता और न ही उसे तेजपाल सिंह के खेतों में मजदूरी करनी पड़ती। उसका कर्ज का बोझ कम होता और वह अपनी आय का अधिक भाग अपने परिवार के लिए बचा पाती।
प्रश्न 12: अपने क्षेत्र के कुछ पुराने निवासियों से बात कीजिए और पिछले 30 वर्षों में सिंचाई और उत्पादन के तरीकों में हुए परिवर्तनों पर एक संक्षिप्त रिपोर्ट लिखिए (वैकल्पिक)।
उत्तर: यह एक क्रियात्मक (Activity) प्रश्न है। छात्र अपने क्षेत्र के वृद्ध निवासियों से बात करें और पिछले 30 वर्षों में निम्न परिवर्तनों के बारे में जानकारी एकत्रित करें —
- सिंचाई में परिवर्तन: पहले कुओं और रहट से सिंचाई होती थी, अब बिजली के नलकूपों और पंप सेटों से होती है।
- उत्पादन के तरीकों में परिवर्तन: पहले पारंपरिक बीजों का प्रयोग होता था, अब एच.वाई.वी. बीजों का प्रयोग होता है। पहले प्राकृतिक खाद का प्रयोग होता था, अब रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का प्रयोग होता है।
- मशीनों का प्रयोग: पहले बैलगाड़ी और हल से जुताई होती थी, अब ट्रैक्टर और हार्वेस्टर का प्रयोग होता है।
- उत्पादन में वृद्धि: आधुनिक विधियों से उत्पादन में काफी वृद्धि हुई है।
प्रश्न 13: आपके क्षेत्र में कौन से गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं? इनकी एक संक्षिप्त सूची बनाइए।
उत्तर: पालमपुर की कहानी के आधार पर हम कह सकते हैं कि गाँवों में निम्न गैर-कृषि उत्पादन कार्य हो रहे हैं —
- डेरी (दूध उत्पादन और बिक्री)
- लघुस्तरीय विनिर्माण (जैसे गन्ने से गुड़ बनाना)
- परिवहन (रिक्शा, ताँगा, जीप, ट्रैक्टर, ट्रक चलाना)
- दुकानदारी (छोटी जनरल स्टोर, कपड़े की दुकान आदि)
प्रश्न 14: गाँवों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारंभ करने के लिए क्या किया जा सकता है?
उत्तर: गाँवों में और अधिक गैर-कृषि कार्य प्रारंभ करने के लिए निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं —
- गाँवों में लघु और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए।
- ग्रामीण युवाओं को व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण देना चाहिए।
- बैंकों से आसान और सस्ता ऋण उपलब्ध कराना चाहिए।
- बाजार और परिवहन की सुविधाएँ बढ़ानी चाहिए।
- सड़क, बिजली, पानी और संचार जैसी बुनियादी सुविधाएँ सुधारनी चाहिए।
- सरकारी योजनाओं का लाभ गाँवों तक पहुँचाना चाहिए।
⚠️ यह सामग्री केवल शैक्षणिक सहायता के लिए है। ये उत्तर NCERT पाठ्यपुस्तक (2024-25) के आधार पर तैयार किए गए हैं। कृपया अपनी पाठ्यपुस्तक से मिलान कर लें।